शनिवार, जुलाई 25, 2009

सुबह

हर सुबह है लाती,
खुशियों की एक पाती,
प्रकृति जगाती मन को,
एक नई खोज पर बुलाती.

आओ नमन करें ईश का,
शीश झुकाकर आभार करें,
तुमने दी ये अनोखी धरा,
तुमने दिया ये सुंदर जीवन.

1 टिप्पणी:

Veena ने कहा…

बहुत ही सुंदर और धार्मिक विचार व्यक्त किये हैं आपने सुबह (morning) के साथ!