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सोमवार, जनवरी 22, 2018

गणतंत्र

हम स्वतंत्र, हम गणतंत्र,
शांति है हमारा मंत्र,

उद्यम के गीत हैं,
आतंक का शोर नहीं,
हो दुश्मन सावधान,
शांत हैं हम,
कमज़ोर नहीं.

बुधवार, अगस्त 19, 2009

सूरज - बाल कविता - २

मुझसे धरती, मुझसे चंदा,
मुझसे सारी सृष्टि,
मुझसे जल, मुझसे नभ,
सब पर मेरी दृष्टि,
मुझसे सारा जीवन है,
मुझसे सारी खुशियां,
मैं सूरज हूं, मेरे पीछे,
दौड़ रही हैं सदियां

शनिवार, जुलाई 25, 2009

सुबह

हर सुबह है लाती,
खुशियों की एक पाती,
प्रकृति जगाती मन को,
एक नई खोज पर बुलाती.

आओ नमन करें ईश का,
शीश झुकाकर आभार करें,
तुमने दी ये अनोखी धरा,
तुमने दिया ये सुंदर जीवन.